Breaking News

vikkykyt@yahoo.com

बचपन में हुआ दया से साक्षात्कार

subhash_chandra_bose

यह प्रसंग सुभाषचंद्र बोस के बचपन के दिनों का है, एक बार सुभाष की मां प्रभावती देवी उनके अध्ययन कक्ष में आईं, तो वह कमरे में नहीं थे। प्रभावती देवी ने देखा कि चीटियों की लंबी कतार सुभाष की मेज से किताबों की अलमारी की ओर जा रही है। उन्होंने फर्श और अलमारी के चारों तरफ ध्यान से देखा। प्रभावती …

Read More »

ऐसे समय में सम्राट भी होता है भिखारी

: ऐसे समय में सम्राट भी होता है भिखारी

सूफी फकीर फरीद से एक बार उनके गांव के व्यक्ति ने कहा कि गांव में मदरसे की जरूरत है। बादशाह तुम्हारी बात मानते हैं, इसलिए तुम उनसे कहो। फरीद ने कहा कि, ठीक में चला जाउंगा। फरीद सुबह के वक्त गए। उनके लिए कोई रोक-टोक नहीं थी। उन्हें सीधे महल में ले जाया गया। उस समय बादशाह खुदा को याद …

Read More »

जब भिक्षु ने पूछा, ईश्वर हैं या नहीं? तथागत ने बताया कि

जब भिक्षु ने पूछा, ईश्वर हैं या नहीं? तथागत ने बताया कि

एक बार भगवान बुद्ध से किसी भिक्षु ने पूछा, ‘तथागत! ईश्वर है या नहीं है? बुद्ध ने सीधा उत्तर न देकर प्रश्नकर्ता भिक्षु से कहा, मनुष्य की समस्या ईश्वर के होने या न होने की नहीं है। मनुष्य की मुख्य समस्या है उसके जीवन में आने वाले दुखों की।’ तथागत ने अपने कथन को स्पष्ट करते हुए तब कहा, ‘तुम …

Read More »

खुश रहने वाले लोग अपने चारो तरफ एक strong support system develop करते हैं:

khush rehne waale vayakti

खुश  रहना  मनुष्य  का जन्मजात  स्वाभाव  होता  है . आखिर  एक  छोटा  बच्चा  अक्सर  खुश  क्यों  रहता  है ? क्यों  हम  कहते  हैं  कि  बचपन के दिन जिँदगी के सबसे अच्छे दिन होते हैं  ? क्योंकि  हम  जन्म से खुश होते हैं ;  पर  जैसे -जैसे  हम  बड़े  होते  हैं   और धीरे -धीर हमारी खुश रहने की आदत उदास रहने की आदत …

Read More »

मैं अछूत हूं

Mahatma budh

जब वैशाली में धम्म प्रचार के लिए गौतम बुद्ध गए तब कुछ सैनिक भागती हुई लड़की का पीछा कर रहे थे। सिपाईयों से बचती हुई वह लड़की एक कुएं के पास खड़ी हो गई। गौतम बुद्ध उस कुएं के पास गए और उस लड़की से बोले, ‘आप स्वयं भी जल पीएं और मुझे भी जल पिलाएं।’ तभी एक सैनिक वहां …

Read More »

राजा को क्यों आती थी गांव में दुर्गंध

kingndianmythology

अवंतिका देश का राजा रवि सिंह महात्मा आशुतोष पर बड़ी ही श्रद्धा रखता था। वह उनसे मिलने रोज कुटिया में जाता था। लेकिन हर बार जब महात्मा को राजा अपने महल में आने के लिए आमंत्रित करता, महात्मा मना कर देते। एक दिन राजा रवि सिंह ने जिद पकड़ ली। तब महात्मा ने कहा, ‘मुझे तुम्हारे महल में दुर्गंध महसूस …

Read More »

लौह पुरुष की पक्की रसोई

sardar-vallabhai

बात पुरानी जरूर है लेकिन है प्रेरणास्पद। दरअसल हुआ यूं कि एक बार लौह पुरुष के नाम से विख्यात सरदार वल्लभ भाई पटेल संत विनोबा भावे जी के यहां गए। विनोबा जी ने उन्हें भोजन ग्रहण करने का आग्रह किया। उन्हीं दिनों उनसे आश्रम से रसोई घर में खाना बनाने के लिए उत्तर भारत से आया कोई साधक जुड़ा हुआ …

Read More »

स्याही से नहीं खून से करो हस्ताक्षर

subhash_chandra_bose_

बात उस समय की है, जब रंगून में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फोज में भर्ती होने के लिए भीड़ लगी हुई थी। नेताजी ने एक मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहां, दोस्तों, आजादी बलिदान चाहती है, तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। भीड़ चिल्ला उठी, नेताजी, आप के एक इशारे पर हम अपना …

Read More »

Cute Letter from a newly married girl to her mother

bride-mother-dress

    प्रिय माँ, हर सामान्य लड़की की तरह, मैं बचपन के दिनों से ही शादी को लेकर उत्साहित थी। मैंने उस समय से आगे के बारे में कभी नहीं सोचा था कि मैं अपने राजकुमार के साथ खुशी से बिताऊंगा। लेकिन आज जब मैं शादीशुदा हूं, तो मुझे एहसास है कि शादी सभी गुलाबों की नहीं है। यह आपके …

Read More »

सुकरात की सच्ची सहिष्णुता

socrates

यूनान के महान दार्शनिक थे सुकरात। उनकी पत्नी झगड़ालू थी। वह छोटी-छोटी बातों पर अमूमन सुकरात से लड़ती थी। लेकिन हर समय सुकरात शांत रहते। सुकरात के पढ़ने की आदत पत्नी को ठीक नहीं लगती थी। एक दिन सुकरात अपने कुछ शिष्यों के साथ घर आए तो पत्नी किसी बात को नाराज हो गई। सुकरात ने इस बात पर ध्यान …

Read More »