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एक बार मुड़ कर तो देखिये …

पहले भटूरे को फुलाने के लिये उसमें ENO डालिये फिर भटूरे से फूले पेट को पिचकाने के लिये ENO पीजिये जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य आप कभी नहीं समझ पायेंगे पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को जीभ से चाटकर कैल्शियम की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें …

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जिस के जप तप से मिलता है

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जिस के जप तप से मिलता है तन मन को आराम,वो राधा का श्याम वो मीरा का घनश्याम, सारे जग का इक खिवैइया सब का पार लगिया,मीरा का घनश्याम कहे कोई राधा का वो कन्हियाँसब के मन को शीतल करता वो प्यारा सा नामवो राधा का श्याम वो मीरा का घनश्याम, राधा का वो रास रचियाँ मीरा के करुना करधन्ये …

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मेरी सुन ले श्याम प्यारे बिगड़ी को तू संवारे

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मेरी सुन ले श्याम प्यारे बिगड़ी को तू संवारे,बिगड़ी तो तू सँवारे मेरी सुन ले श्याम प्यारे,बिगड़ी को तू संवारे बिगड़ी तो तू सँवारे…… इक पल को तू हँसाए ख़ुशियाँ सी गुनगुनाएं,दूजे ही पल हुआ क्या इतना भी क्यों रुलाए,बैठी हूँ तेरे द्वारे हँसते हैं, लोग सारे,मेरी सुन ले श्याम प्यारे बिगड़ी को तू संवारे,बिगड़ी तो तू सँवारे… मीरा हुई …

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राधे कर बदलाँ दी छां कि आज मेरे शाम ने आना

राधे कर बदलाँ दी छां कि आज मेरे शाम ने आनानी मैं छम छम नाच्दी फिराँ कि आज हाराँ वाले ने आन जदो हाराँ वाले कुटिया तो चल पए औधो चल पई ठंडी-ठंडी हवाकि आज मेरे शाम ने आनाओ राधे कर………. जदो हाराँ वाले साड्ड़ी गली विच आ गयेमैं तां फुल वर्सान्दी फिराँ, कि आज मेरे शाम ने आनाओ राधे …

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श्याम मेरी अब तो पकड़ो कलाई

श्याम मेरी अब तो पकड़ो कलाई,हूँ अकेला यहाँ नहीं कोई मेरा,मेरी बांके चलो परछाई,श्याम मेरी अब तो …………. इस दुनिया में एक तू ही मेरा,दूजा ना कोई सहारा है,मन में विश्वास जगा कर के,मैंने तुझको आज पुकारा है,मेरी सुनके पुकार तू आजा एक बार,अब तो कर लो सुनवाई,श्याम मेरी अब तो ……………. आकर के देखो हाल मेरा,इस जग ने क्या …

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मनमोहन तुम रूठ गए तो कौन मेरा जग में

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मनमोहन तुम रूठ गए तो कौन मेरा जग मेंकान्हा कौन मेरा ज आग मेंसाथ रहे हो अब ना रहा तो कौन मेरा जग मेंकान्हा कौन मेरा ज आग में…… ज़िंदगीका कारवाँ रुकता नहीं हैदिल है श्याम तुम बिन धड़कता नहीं हैचलने से पहले मैं गिर गया तो कौन मेरा जग मेंकान्हा कौन मेरा ज आग में….. तुम्हे क्या नहीं खबर …

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जब याद कान्हा तेरी आई

aao kanhaiya aao muraaree- krishn bhajan

जब याद कान्हा तेरी आईमोरे नैन नीर भर आयेमैं रोया तुझे याद करके कान्हामैं रोया तुझे याद करके……….. याद आता है तेरा माखन चुरानावो गोपियों को पनघट बुलानाकैसे सही कान्हा तेरी जुदाईमोरे नैन नीर भर आयेमैं रोया तुझे याद करके कान्हामैं रोया तुझे याद करके……….. मेरे साजन मेरे माहीकाहे सताए आजा कन्हाईकाहे जग में है मुझे बिसराईमोरे नैन नीर भर …

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हर समय अरदास करूँ मैं

हर समय अरदास करूँ मैंचरणों में श्याम तेरेतूने दिया है नया सवेराकर दिए दूर अँधेरेतेरी दया से ओ श्याम बाबामैं हूँ बड़ा खुशहालमेरे सांवरियारखना मेरा ख़यालमेरे सांवरियारखना यूँ ही ख़याल| तूने ही मुझको बाबाहिम्मत सदा बंधाईजब जब डूबी नैया मेरीतुमने पार लगाईंबदल ना पाया जो कोई बाबातुमने बदले हालमेरे सांवरियारखना मेरा ख़यालमेरे सांवरियारखना यूँ ही ख़याल। सोचा ना था ऐसा …

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क्रोध अकेला नहीं आता

सभी धर्मों में क्रोध को सर्वनाश का प्रमुख कारण बताया गया है। महाभारत में कहा गया है कि निद्रां तंद्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रिता। इसलिए आलस्य एवं क्रोध आदि दुर्गुणों को छोड़ने में ही कल्याण है। क्रोध के कारण मानव आवेश में आकर विवेक खो बैठता है तथा उसका दुष्परिणाम कई बार अत्यंत घातक होता है। आचार्य महाप्रज्ञ ने लिखा …

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सत्कर्म करते रहो

सत्कर्म करते रहो

विधि का नियम है कि मानव को जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत कुछ-न- कुछ कर्म करते रहना पड़ता है। इसलिए धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य को हर क्षण सत्कर्म में ही व्यतीत करना चाहिए। सत्कर्म करते रहने में ही जीवन की सार्थकता है। आदि शंकराचार्य कहते हैं, जो पुरुषार्थहीन है, वह वास्तव में जीते-जी मरा हुआ है। गीता में …

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