पवित्र सावन माह की शुरुआत हो गई है। शिव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माने जाने वाले इस माह में सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा का महत्त्व है। आज सावन का पहला सोमवार है। भगवान शिव को सावन यानी श्रावण का महीना बेहद प्रिय है जिसमें वह अपने भक्तों पर अतिशय कृपा बरसाते हैं। ऐसी मान्यता है …
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क्यों प्रिय है भगवान शिव को बेलपत्र
शिव पूजा का सबसे पावन दिन है सोमवार। सभी देवों में शिव ही ऐसे देव हैं जो अपने भक्तों की भक्ति-पूजा से बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं। शिव भोले को आदि और अनंत माना गया है जो पृथ्वी से लेकर आकाश और जल से लेकर अग्नि हर तत्व में विराजमान हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें …
Read More »रुद्राभिषेक क्यों है इतना प्रभावी और महत्वपूर्ण
भगवान शिव अनादि व अनन्त हैं अर्थात न तो कोई भगवान शिव के प्रारंभ के बारे में जानता है और न ही कोई अंत के बारे में। इसलिए इन्हें अजन्मा और अनश्वर भी कहते हैं। भगवान शिव का स्वरूप जितना रहस्यमय है, वे उतने ही सरल भी हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से …
Read More »जो हाथ से चला गया उसका दुख क्या करना!
एक आदमी तड़के नदी की ओर जाल लेकर जा रहा था। नदी के पास पहुंचने पर उसे आभास हुआ कि सूर्य अभी पूरी तरह बाहर नहीं निकला हैं। घने और अंधेरे में वह मस्ती से टहलने लगा। तभी उसका पैर झोले से टकराया। उत्सुकतापूर्वक उसने झोले में हाथ डाला तो पाया कि उसमें बहुत बड़े-बड़े चमकीले पत्थर भरे पड़े …
Read More »यह भी कट जाएगा
एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा कि राजन इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये कि जब तुम्हे लगे कि बस अब तो सब ख़तम होने वाला है ,परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ ,कोई प्रकाश की किरण नजर ना …
Read More »दिल को छू लेने वाली कहानी
छोटी मनु ने गुल्लक से सब सिक्के निकाल लिए और उनको बटोर कर जेब में रख लिया, घर से निकल पड़। पास में ही केमिस्ट की दुकान थी। उसके जीने वह धीरे धीरे चढ़ गयी | वो काउंटर के सामने जाकर खड़ी हो गयी। और बोलने लगी। पर छोटी सी मनु पर किसी का भी ध्यान नहीं गया। और न …
Read More »भक्ति की शक्ति
एक बार तुलसीदास जी वृन्दावन आये वहॉ पर वह नित्य ही कृष्ण स्वरूप श्री नाथजी के दर्शन को जाते थे उस मंदिर में एक महंत थे जिनका नाम परशुराम था एक दिन जब नित्य कि तरह तुलसी बाबा दर्शन करने पहुँचे तो उनहोंने देखा कि बंशी लकुट काछनी काछे मुकुट माथ माला उर आछे प्रभु के एक हाथ में बंशी …
Read More »परंपरा का निर्माण
जीवन के साथ आयुर्वेद का गहरा संबंध होने के कारण पितामह ब्रह्मा ने आयुर्वेद के पठन – पाठन की परंपरा स्थापित की । ब्रह्मा जी ने इस चिकित्सा – शास्त्र को अपने मानसपुत्र दक्ष को और दक्ष ने अश्विनीकुमारों को तथा अश्विनीकुमारों ने देवराज इंद्र को पढ़ाया । इस तरह यह परंपरा आजतक चलती चली आ रही है । यद्यपि …
Read More »चिकित्सकों के चिकित्सक भगवान शिव
भगवान रुद्र ने ओषधियों का निर्माण करके जगत का इतना कल्याण किया है कि वेद ने भी भगवान शंकर सम्पूर्ण शरीर को ही भेषज मान लिया है । कहा है कि – या ते रुद्र शिवा तनू शिवा विश्वस्य भेषजी । शिवा रुद्रस्य भेषजी तया नो मृड जीवसे ।। सचमुच आयुर्वेद भगवान शिव के रूप में ही अभिव्यक्त हुआ था, …
Read More »गीता और वेद
गीता वेदों को बहुत आदर देती है । भगवान अपने को समस्त वेदों के द्वारा जाननेयोग्य, वेदान्तका रचनेवाला और वेदों को जाननेवाला कहकर उनका महत्तव बहुत बढ़ा देते हैं । संसार रूपी अश्वत्थवृक्षका वर्णन करते हुए भगवान कहते हैं कि ‘मूलसहित उस वृक्षको तत्व से जाननेवाला ही वास्तव में वेद के तत्व को जाननेवाला है’ । इससे भगवान ने यह …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…