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Gyan Ki Baat

निंदकों और आलोचकों से बचने का आसान उपाय

निंदकों और आलोचकों से बचने का आसान उपाय

रविन्द्रनाथ टैगोर विचारक ही नही, बल्कि शांत साधक थे। वे भयमुक्त थे। उनका स्वभाव शांत थे। वह काफी कम बात किया करते थे। कुछ लोग रविन्द्रनाथ टैगोर जी की निंदा करते थे। एक बार शरत् बाबू ने टैगोर से कहा, ‘मुझे आपकी निंदा सुनी नहीं जाती। आप अपनी आधारहीन आलोचना का प्रतिकार करें। टैगोर ने शांत भाव से इस बात …

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इस दुनिया में श्रेष्ठ और महान कौन

इस दुनिया में श्रेष्ठ और महान कौन

एक बार मगध के सम्राट बिम्बिसार संत सत्यकेतु के आश्रम में पहुंचे और दण्डवत होकर निवेदन किया कि भगवन इस विश्व में श्रेष्ठ और महान व्यक्ति कौन है? सत्यकेतु ने सामने खेत में काम कर रही एक अधिक उम्र की वृद्धा की ओर संकेत करते हुए कहा- ‘उधर देखिए, उस वृद्धा के शरीर में शक्ति नहीं है, लेकिन कुदाली चला …

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जब वीर शिवाजी लाए सिंहनी का दूध

समर्थ गुरु रामदास स्वामी अपने शिष्यों में सबसे अधिक स्‍नेह छत्रपति शिवाजी महाराज से करते थे। शिष्य सोचते थे कि उन्हें शिवाजी से उनके राजा होने के कारण ही अधिक प्रेम है। समर्थ ने शिष्यों का भ्रम दूर करने के बार में विचार किया। एक दिन वे शिवाजी सहित अपनी शिष्य मंडली के साथ जंगल से जा रहे थे। रात्रि …

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परमहंस ने बताया सांसारिक बंधनों से ऐसे पाएं छुटकारा

एक बार रामकृष्ण परमहंस नदी के घूम रहे थे। उनके साथ उनके कुछ शिष्य भी थे। रामकृष्ण परमहंस अपने शिष्यों से बातें कर रहे थे। नजदीक ही नदी के किनारे अनेक मछुआरे मछलियां पकड़ रहे थे। कभी मछलियां मछुआरों के हाथ लग जातीं, तो कभी निराशा उनके हाथ लगती। रामकृष्ण परमहंस जाल में फंसी मछलियों की गतिविधियों को बड़े ध्यान …

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शांति चाहिए तो पहले विवेक जागृत कीजिए

शांति चाहिए तो पहले विवेक जागृत कीजिए

संत अनाम टीले पर बैठे हुए अस्त होते सूर्य को देख रहे थे कि एक व्यक्ति आया और अभिवादन करके उनके सामने चुपचाप खड़ा हो गया। अनाम ने मुस्कुराते हुए पूछा मेरे लिए कोई सेवा। व्‍यक्‍ित ने जिज्ञासापूर्ण दृष्टि से अनाम की ओर देखते हुए कहा- आप बड़े शांत, प्रसन्न और सुखी प्रतीत होते हैं। मुझे लगता है कि आप …

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चीन के संत च्वांगत्से को कपाल ने दिया ज्ञान

चीन के संत च्वांगत्से को कपाल ने दिया ज्ञान

चीन के प्रसिद्ध संत च्वांगत्से रात के समय घूम रहे थे। अचानक उनको ठोकर लगी। उन्होंने संभल कर देखा वहां एक मानव की खोपड़ी पड़ी हुई थी। दार्शनिक कुछ देर खड़े होकर सोचते रहे फिर उन्होंने खोपड़ी उठाई और अपने थैले में डाल दी। उस दिन के बाद जब भी वे कहीं जाते उसे अपने साथ ही रखते। एक दिन …

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बापू की असाधारण और अक्षम्य गलती

बापू की असाधारण और अक्षम्य गलती

एक दिन मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) शाम की प्रार्थना सभा में बोलते-बोलते बहुत परेशान हो गए। उन्होंने कहा, जो गलती मुझसे हुई है, वह असाधारण और अक्षम्य है। कई बरस पहले मुझे इसका पता लगा, पर तभी मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस कारण से कई वर्ष नष्ट हो गए। मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया है। दरिद्रनारायण की …

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महात्मा गांधी जब साइकिल से पहुंचे सभास्थल

महात्मा गांधी जब साइकिल से पहुंचे सभास्थल

महात्मा गांधी समय के बड़े पाबंद थे। एक बार उन्हें एक सभा में भाषण देने का निमंत्रण मिला। निमंत्रण देने वाले सज्जन ने ठीक साढ़े तीन बजे गांधी जी को लेने के लिए आने का वादा किया। अगले दिन अपनी आदत के अनुसार गांधी जी ठीक साढ़े तीन बजे तैयार हो गए, पर कोई उन्हें लेने के लिए नहीं आया। …

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धर्म के आगे कुछ नहीं

धर्म के आगे कुछ नहीं

गांधीजी के पुत्र मणिलाल एक बार बचपन में बहुत बीमार हो गए। डॉक्टर को बुलाया गया। डॉक्टर ने जांच के बाद कहा, बच्चे को मीट का शोरबा देना पड़ेगा। बापू शाकाहारी थे। इसीलिए उन्होंने डॉक्टर से निवेदन किया कि वह बच्चे को शोरबे के बदले कोई और खाद्य बताएं। डॉक्टर ने इस पर झुंझलाती हुए कहा, बापू, आपके बच्चे की …

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रामनाम और महात्मा गांधी

राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ निवासी बालूराम अढ़तिया रामनाम के आढ़ती के नाम से विख्यात थे। वे अपने साथ एक बही रखते और किसी भी प्रमुख व्यक्ति के पास पहुंचकर उनसे प्रार्थना करते कि आप इस बही में अपने हाथ से लिखें कि भगवान के इतने हजार नामों का जप प्रतिदिन किया करेंगे। एक बार गांधीजी मुंबई आए हुए थे। आढ़तिया भाई …

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