मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. जो की लोगो के समूह के बीच मे रहता है ,इस समूह मे कई तरह के रिश्तो को वो निभाता है ! कुछ रिश्ते निस्स्वार्थ होते है ,जबकि अधिकतर रिश्तो की नीव स्वार्थ पर टिकी होती है! हम जो professional relation बनाते हैं, वो अधिकतर आदान प्रदान या यो कहें एक से दूसरे को ,और …
Read More »Gyan Ganga
इन लोगों को नहीं दें दुःख बनी रहेगी प्रभु की कृपा
सूफी संत बायजीद ने घर छोड़कर वर्षों तक वन में तप किया। जब उन्हें साधना का लक्ष्य मिल गया, तो उन्होंने घर जाकर अपनी मां से मिलने का निर्णय लिया। घर पहुंचे तो उन्होने मां को कहते सुना कि, मेरे प्रभु मेरे दुःखी बेटे को सुख-शांति देना। उसे संतों का आश्रय मिले। बायजीद ने बाहर से ही मां को आवाज …
Read More »कौन ज्यादा मनहूस आप या वो?
एक नगर में एक व्यक्ति इसीलिए मशहूर हो गया कि उसका चेहरा मनहूस था। ऐसा उस नगर में रहने वाले लोग कहते थे। यह बात जब राजा के पास पहुंची तो इस धारणा पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ। राजा ने उस व्यक्ति को अपने महल में रख लिया और सुबह उठते ही उस व्यक्ति का मुंह देखा। इस तरह …
Read More »अरुणिमा सिन्हा की प्रेरणादायक कहानी
11 अप्रेल, 2011 ! राष्ट्रीय स्तर की वालीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा ( Arunima Sinha ) , पद्मावती एक्सप्रेस में लखनऊ से दिल्ली जा रही थी| बीच रास्ते में कुछ लुटेरों ने सोने की चेन छिनने का प्रयास किया, जिसमें कामयाब न होने पर उन्होंने अरुणिमा को ट्रेन से नीचे फेंक दिया| arunima sinha motivational story in hindi पास के ट्रैक …
Read More ». शिष्टाचार – स्वामी विवेकानंद प्रेरक प्रसंग ‘Etiquette – Swami Vivekananda motivational context’
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि–विश्व में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते हैं, क्योंकि उनमें समय पर साहस का संचार नही हो पाता और वे भयभीत हो उठते हैं। स्वामीजी की कही सभी बातें हमें उनके जीवन काल की घटनाओं में सजीव दिखाई देती हैं। उपरोक्त लिखे वाक्य को शिकागो की एक घटना ने सजीव कर दिया, किस तरह विपरीत परिस्थिती में भी उन्होने …
Read More »समय का सदुपयोग ( Essay on Time)
समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं, किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता। वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ …
Read More »साड़ी के टुकड़े
एक नगर में एक जुलाहा रहता था। वह स्वभाव से अत्यंत शांत, नम्र तथा वफादार था। उसे क्रोध तो कभी आता ही नहीं था। एक बार कुछ लड़कों को शरारत सूझी। वे सब उस जुलाहे के पास यह सोचकर पहुंचे कि देखें इसे गुस्सा कैसे नहीं आता? उन में एक लड़का धनवान माता-पिता का पुत्र था। वहां पहुंचकर वह बोला …
Read More »इंसान का सच्चा धन क्या ???
असल में यह धन ,बांग्ला -गाडी आदि हमारा सच्चा धन नहीं है। इंसान का सच्चा धन तो असल में कुछ और ही है। चलिए जानते हैं :- एक बार एक शक्तिशाली राजा घने वन में शिकार खेलने चला गया। अचानक ही आकाश में बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। सूर्य अस्त होने लगा और धीरे-धीरे अँधेरा छाने लगा। …
Read More »ऐसे नियंत्रित करें मन की एकाग्रता
स्वामी विवेकानंद शिकागो में व्याख्या देने के बाद अमेरिका में उदार मानव धर्म के वक्ता के रूप में प्रसिद्ध हो गए। वहां स्वामी जी वेदांत दर्शन पर प्रवचन दिया करते थे। इस संबंध में उनका प्रवास अमेरिका के उन अंदरूनी इलाकों में भी होता था, जहां धर्मांध और संकीर्ण विचारधारा के लोग रहते थे। एक बार स्वाम जी एक ऐसे …
Read More »प्रोफ़ेसर की सीख
प्रोफ़ेसर साहब बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त से मिलने उसकी दुकान पर गए। इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था…दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बैठ कर गप्पें मारने लगे। चाय-वाय पीने के कुछ देर बाद प्रोफ़ेसर बोले, “यार एक बात बता, पहले मैं जब भी आता था …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…